जम्मू-कश्मीर में सियासी भूचाल, उमर अब्दुल्ला की कुर्सी पर मंडराया खतरा!

Rashmi Tiwari

NEWS PR डेस्क : जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर बढ़ती नाराजगी ने सियासी हलचल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार के सामने अब अपने ही विधायकों को मनाने की चुनौती खड़ी हो गई है। मंत्रिमंडल विस्तार से नाराज करीब 25 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी मांगें रखी हैं। इसी बीच शुक्रवार को श्रीनगर में पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के आवास पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नाराज विधायकों के बीच अहम बैठक हुई।बैठक का मकसद असंतुष्ट विधायकों की नाराजगी दूर करना और सरकार को संभावित संकट से बचाना माना जा रहा है।

मंत्रिमंडल विस्तार के बाद बढ़ी नाराजगी
नेशनल कॉन्फ्रेंस में असंतोष की शुरुआत 27 अक्टूबर को हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद हुई। इस दौरान चार विधायकों अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू को मंत्री बनाया गया। वहीं, कई वरिष्ठ विधायक मंत्रिमंडल में जगह पाने से वंचित रह गए।
नाराज विधायकों का आरोप है कि मंत्रियों के चयन में वरिष्ठता और जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के बीच उचित प्रतिनिधित्व का ध्यान नहीं रखा गया। असंतुष्ट विधायक सरकार और संगठन में बदलाव की मांग कर रहे हैं। इनमें उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी से PWD विभाग वापस लेने, मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाने और विधायकों को निर्णय प्रक्रिया में अधिक महत्व देने जैसी मांगें शामिल हैं।
आगा रूहुल्लाह के इस्तीफे से बढ़ी मुश्किल
इसी बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के पूर्व सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने 3 नवंबर को पार्टी और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके बाद श्रीनगर लोकसभा सीट रिक्त हो गई है।
क्या गिर जाएगी उमर अब्दुल्ला सरकार?
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 90 निर्वाचित सीटें हैं और बहुमत के लिए 46 विधायकों का समर्थन जरूरी है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 41 विधायक हैं। कांग्रेस और अन्य समर्थक विधायकों के सहयोग से सरकार को बहुमत प्राप्त है। वहीं, बीजेपी के पास 29 विधायक हैं।

हालांकि, अगर नाराज विधायक सामूहिक इस्तीफा देते हैं और उनके इस्तीफे स्वीकार होते हैं, तो सरकार के सामने बहुमत का संकट खड़ा हो सकता है। लेकिन फिलहाल किसी सामूहिक इस्तीफे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही सरकार गिरने की कोई घोषणा हुई है। अब सबकी नजर फारूक और उमर अब्दुल्ला की बैठक पर है। देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व नाराज विधायकों को मनाने में कितना सफल होता है और जम्मू-कश्मीर की सियासत में आगे क्या नया मोड़ आता है।

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