चैत नवरात्रि के तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा के इस मंदिर में दर्शन को लगी भक्तो कि भीड़

Patna Desk
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कैमूर-चैत नवरात्रि के पूरे नौ दिन मां दुर्गा के सभी रूपों की पूजा अर्चना की जाती है. आज गुरुवार के दिन चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है और यह दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित माना गया है. मान्यता है कि आज यानी गुरुवार को नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की श्रद्धा पूर्वक पूजा अर्चना करने से व्यक्ति को रोगों से मुक्ति मिलने के साथ-साथ भय भी दूर होता है. आइए जानते हैं मां चंद्रघंटा के उन मंदिरों के बारे में जहां दर्शन मात्र से होता है भक्तों का उद्धार.

नवरात्रि के तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा के इस मंदिर में दर्शन से , मिलेगी रोग और भय से मुक्ति-

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चैत नवरात्रि का आज तीसरा दिन है. आज के दिन भक्त मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा अर्चना करते हैं साथ ही मां मुंडेश्वरी मंदिर में जाकर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. देश में माता के बहुत से मंदिर है सभी मंदिर किसी विशेष देवी को समर्पित होते है. इन मंदिरों से जुड़ी कुछ चमत्कारी विशेषताओं के कारण यह बहुत ही खास माने जाते हैं. आइए जानते हैं मां चंद्रघंटा के ऐसे ही कुछ खास मंदिर के बारे में.”

“बिहार के कैमूर(भभुआ)जिले के भगवानपुर प्रखंड अंतर्गत रामगढ़ पंचायत के पवरा पहाड़ी पर स्थित विराजमान मां मुंडेश्वरी देवी का मंदिर स्थित है। मां चंद्रघंटा के साथ नौ दुर्गा के दर्शन

नवरात्रि में माता के दर्शन करने के लिए भक्तों के लाइन लगी रहती है. बिहार प्रदेश के कैमूर (भभुआ)में मां का एक प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिर है. जिसे मां मुंडेश्वरी मंदिर के नाम से जाना जाता है. पुराणों में इस मंदिर का विशेष तौर पर उल्लेख किया गया है. मां दुर्गा यहीं पर मां चंद्रघंटा के रूप में विराजमान हैं. साथ ही यह कहना गलत नहीं होगा कि यह एक ही ऐसा मंदिर है, जहां देवी के सभी नौ स्वरूपों के दर्शन एक जगह पर हो जाते हैं. ऐसी मान्यता है कि यहां आकर मां के दर्शन करने से ही भक्तों के शारीरिक और मानसिक तनाव और कष्ट दूर होने लगते हैं.

 

ऐसे होता है मां का श्रृंगार

नवरात्रि के दौरान इस मंदिर में नौ दुर्गा की मूर्ति का श्रृंगार फूलों और पत्तियों से किया जाता है. यहां की खास बात ये है कि इस मंदिर में नवरात्रि के हर दिन मां मुंडेश्वरी देवी के अलग-अलग स्वरूपों का विशेष श्रृंगार किया जाता है. मंदिर में रोज सुबह और शाम मां का नए वस्त्र, आभूषण और पुष्पों से श्रृंगार करके सामूहिक आरती की जाती है. इस अवसर पर भक्तों के मन की मुराद पूरी करने के लिए भक्त व्रत और पूजन से शक्ति स्वरूपा मां मुंडेश्वरी की आराधना करते हैं. इस मंदिर में बैंड बाजे के साथ माता के विभिन्न प्रतीकों के निशान के भी झलक मिलती है मां मुंडेश्वरी के यहां बकरा चढ़ाने की विशेष परंपरा है. मान्यता है कि इससे मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैं.

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नवरात्रि के तीसरे दिन इस तरह करें मां चंद्रघंटा को प्रसन्न, जानें विधि,माता मां मुंडेश्वरी के दर्शन मात्र से ही भक्तों का हो जाता है सभी तरह का कल्याण-

बेहद खास है यह मंदिर की अनूठी परंपरा यह खासियत है कि यहां मां चंद्रघंटा के साथ सभी नौ दुर्गा के दर्शन एक साथ हो जाते हैं. लेकिन इसके अलावा भी इस मंदिर पर माता भक्तों की गहरी आस्थ है. कहते हैं कि मां मुंडेश्वरी के दर्शन मात्र से ही लोगों के शारीरिक और मानसिक कष्टों में कमी आ जाती है. ऐसी मान्यता है कि मां मुंडेश्वरी के इस स्वरूप का दर्शन करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और मां अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करती है.

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