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- गांव से निकले युवक ने लिखी नई इबारत
- पति-पत्नी साथ मिलकर गढ़ रहे हैं इतिहास
- मुश्किल दौर में भी कभी हिम्मत नहीं हार
- प्रतिद्वंद्वी बनने से बेहतर प्रतियोगी बनने में विश्वास रखते हैं
- NEWS PR DESK- युवा उद्यमी संजीव श्रीवास्तव को भीड़ का हिस्सा बनना कभी पसंद नही। बल्कि भीड़ से अलग कुछ कर दिखाने की चाहत हमेशा बनी रहती है आज उसी का नतीजा है कि बड़े मुकाम को हासिल कर पाए हैं। एमबीए की पढ़ाई कर श्री संजीव जी एक बड़ी कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर के रुप में ज्वाइन किए और आगे चलकर अपनी मेहनत के बूते उसी कंपनी में सीईओ तक का सफर तय किया।
पटना में अक्सर देखा करते थे कि लोगों को रहने के लिए अपने एक आशियाने के तरसते थे। कुछ वर्षों बाद इन्होंने नौकरी छोड़ दी और एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में बहुत कम पैसे की पगार पर ज्वाइन कर काम को सीखने लगे। तीन माह बाद दूसरी कंपनी में फिर से जीएम बने। इसके बाद कुछ अलग करने की तमन्ना की वजह से 7 सितंबर, 2018 को अपनी खुद की कम्पनी पल्वी राज कंस्ट्रक्शन और ड्रीम प्रोजेक्ट की स्थापना कर डाली। इसके तहत हर किसी के सपनों का घर हो इस परिकल्पना को पूरा करने के लिए अपनी पत्नी पूजा श्रीवास्तव के साथ पूरी शिद्दत से अपार्टमेंट निर्माण कार्य से जुड़ गए और नई कीर्ति खड़ा कर दी। पल्वी राज कंस्ट्रक्शन की शुरुआत ही आगे चलकर एक समूह में तब्दील हो गई। वैसी संजीव श्रीवास्तव अपनी बेटी श्रृणिका को लकी मानते हैं और अपनी उपलब्धि का श्रेय बेटी को देते हैं। आज की तारीख में इनकी कंपनी ‘गोवा सिटी’,सगुना मोड़, दानापुर, ‘’ सिंगापुर सिटी‘’, पटना एम्स, ‘श्रृणिका’, बेली रोड, पटना के साथ सबके सपनों को पूरा करने में जुटे हैं। समाजसेवा में गहरी रुचि रखने की वजह से कोरोना महामारी के दौरान भी इन्होंने अपने यहां काम करने वाले किसी भी कर्मी को न हटाया और न ही किसी के पैसे में कटौती की। हमेशा सकारात्मक सोच के साथ काम करने का नतीजा रहा कि आज यह दंपत्ति नित्य नई इबारत लिख रहे हैं।
सोहन लाल द्विवेदी की वो पंक्ति इन पर सटिक बैठती है-
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
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