सिमराही नगर पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर बढ़ा विवाद, EO ने आरोपों को बताया निराधार

सिमराही नगर पंचायत में 2.49 करोड़ की खरीद पर घमासान, पार्षदों ने लगाए भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप

Rashmi Tiwari
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NEWS PR डेस्क: सुपौल जिले के नगर पंचायत सिमराही में स्वच्छता एवं विकास कार्यों के लिए की गई लगभग 2.49 करोड़ रुपये की खरीद को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नगर पंचायत की कार्यप्रणाली और खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए वार्ड पार्षदों एवं जनप्रतिनिधियों ने वित्तीय अनियमितता और नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए हैं।रविवार को सिमराही स्थित एक होटल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनप्रतिनिधियों ने नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी वीणा वैशाली पर खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरतने और विभागीय नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।


जांच रिपोर्ट का किया हवाला
पार्षदों का दावा है कि जिलाधिकारी सुपौल द्वारा कराई गई जांच में लगाए गए कई आरोप सही पाए गए हैं। उनके अनुसार जांच रिपोर्ट नगर विकास एवं आवास विभाग को भेजी जा चुकी है और मामले में आगे की कार्रवाई की प्रतीक्षा की जा रही है।
खरीद प्रक्रिया पर उठे सवाल
प्रेस वार्ता में जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि डस्टबिन, कचरा संग्रहण वाहन, ट्रैक्टर, पीपीई किट, चलंत शौचालय, सक्शन मशीन, फॉगिंग मशीन और हाईमास्ट लाइट सहित विभिन्न सामग्रियों की खरीद में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।आरोप है कि कई सामग्रियां बाजार मूल्य से अधिक दर पर खरीदी गईं, जबकि कुछ उपकरण उपयोग में नहीं आ सके या अल्प समय में खराब हो गए।
डस्टबिन खरीद को लेकर भी विवाद
जनप्रतिनिधियों के अनुसार जुलाई 2025 में करीब 16.50 लाख रुपये की लागत से खरीदे गए 75 स्टील डस्टबिन लंबे समय तक उपयोग में नहीं लाए गए। शिकायतों के बाद मई 2026 में इनमें से कुछ डस्टबिन विभिन्न स्थानों पर लगाए गए।
रिश्तेदारी और पक्षपात के भी आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी आरोप लगाया गया कि खरीद प्रक्रिया में एक गैर-सरकारी व्यक्ति को बायर की भूमिका दी गई। साथ ही कुछ आपूर्तिकर्ता फर्मों के कार्यपालक पदाधिकारी के परिजनों से जुड़े होने का भी दावा किया गया। जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
कार्यपालक पदाधिकारी ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी वीणा वैशाली ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि डस्टबिन समेत अन्य मामलों की जांच पहले ही की जा चुकी है और आरोपों में कोई ठोस आधार नहीं मिला है।उन्होंने कहा कि कुछ लोग राजनीतिक कारणों से नगर पंचायत के विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न करने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि सभी खरीद प्रक्रियाएं विभागीय नियमों के अनुरूप पूरी की गई हैं। सुपौल से अल्ताफ राजा की रिपोर्ट

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