NEWS PR डेस्क:मोहर्रम की नौवीं तारीख की रात सुपौल नगर क्षेत्र में श्रद्धा, अनुशासन और पारंपरिक विरासत का अद्भुत संगम देखने को मिला। ईदगाह मोहल्ला और ऐतिहासिक बड़ा इमामबाड़ा, धोबी टोला से भव्य ताजिया जुलूस निकाला गया, जो नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए हुसैन चौक पहुंचा।

कर्बला की शहादत को दी गई श्रद्धांजलि
इस अवसर पर बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर इमाम हसन और इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। मोहर्रम का यह पर्व कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों द्वारा सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा के लिए दिए गए महान बलिदान की याद में मनाया जाता है।
पारंपरिक खेल और हैरतअंगेज प्रदर्शन
हुसैन चौक पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में खिलाड़ियों ने पारंपरिक युद्धक कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। लाठी, भाला, तलवार, फरसा और डंडा जैसे पारंपरिक हथियारों के साथ दिखाए गए करतबों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
इन प्रदर्शनों का उद्देश्य केवल कौशल दिखाना नहीं, बल्कि बहादुरी, अनुशासन और आत्मरक्षा की परंपरा को जीवित रखना भी रहा।
सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम
जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। सुपौल सदर थानाध्यक्ष रामसेवक रावत के नेतृत्व में भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की गई थी। संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी गई, जिससे पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सका।
शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ आयोजन
प्रशासन की सतर्कता और लोगों के सहयोग से पूरा ताजिया जुलूस शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। देर रात तक लोग कार्यक्रम का हिस्सा बने रहे और कर्बला के शहीदों को श्रद्धा के साथ याद करते रहे।सुपौल से अल्ताफ राजा की रिपोर्ट
