अगर लागू हुआ केंद्र सरकार का यह प्लान तो 50% तक बढ़ जाएगी बिहार-झारखंड की लोकसभा सीटें,बढ़ेगी सियासी पावर

Asha Rai
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NEWS PR डेस्क: केंद्र सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम को जल्द लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। चर्चा है कि इसे आगामी जनगणना और पूर्ण परिसीमन से अलग कर लागू किया जा सकता है। प्रस्तावित बदलाव के तहत लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती हैं, जिनमें करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बदलाव का बड़ा फायदा बिहार और झारखंड जैसे राज्यों को मिल सकता है। अनुमान है कि बिहार की लोकसभा सीटें 40 से बढ़कर 60 और झारखंड की सीटें 14 से बढ़कर 21 हो सकती हैं।

दरअसल, सरकार महिला आरक्षण कानून में संशोधन को लेकर विपक्ष से बातचीत कर रही है। सूत्रों के अनुसार, महिला आरक्षण को फिलहाल जनगणना और परिसीमन से अलग करने पर विचार हो रहा है। साथ ही, लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का रास्ता भी तलाशा जा रहा है।

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अगर यह प्रस्ताव संसद से पास होता है, तो 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण किया जा सकता है, जिससे अधिक आबादी वाले राज्यों को बेहतर प्रतिनिधित्व मिलेगा।

बिहार के लिए यह बदलाव खास माना जा रहा है। लंबे समय से बढ़ती आबादी के अनुपात में अधिक सीटों की मांग उठती रही है। सीटों में संभावित 50% वृद्धि से न सिर्फ राज्य की आवाज संसद में मजबूत होगी, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन भी बेहतर हो सकेगा। वहीं झारखंड में भी आदिवासी बहुल इलाकों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।

इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी नेताओं के साथ बैठक भी की है। बैठक में महिला आरक्षण को जल्द लागू करने और सीटों की संख्या बढ़ाने पर सहमति बनाने की कोशिश की गई।

गौरतलब है कि 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम मूल रूप से नई जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होना था, जिसमें समय लग सकता था। लेकिन अब सरकार इसे जल्दी लागू करने के लिए दो अलग-अलग विधेयक लाने की तैयारी में है।

सरकार का प्रयास है कि सीटों का अनुपात संतुलित रखा जाए, ताकि दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को भी दूर किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू हो सकता है।

अगर यह योजना लागू होती है, तो बिहार और झारखंड की भूमिका राष्ट्रीय राजनीति में पहले से ज्यादा मजबूत हो जाएगी। ज्यादा सीटों का मतलब होगा ज्यादा प्रतिनिधित्व और ज्यादा प्रभाव—जो इन राज्यों की सियासत को नई दिशा दे सकता है।

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