मधुबनी में बाढ़-सुखाड़ को लेकर प्रशासन अलर्ट, प्रभारी मंत्री ने तैयारियों की समीक्षा की

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: मधुबनी, 26 मई। जिले में संभावित बाढ़ और सुखाड़ को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। सोमवार को डीआरडीए सभागार में भवन निर्माण विभाग की मंत्री सह मधुबनी जिला प्रभारी मंत्री लेशी सिंह की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें आपदा से निपटने की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में प्रभारी मंत्री ने कहा कि सरकार बाढ़ और सुखाड़ जैसी आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राहत और बचाव से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं समय रहते पूरी कर ली जाएं, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को तत्काल सहायता मिल सके।

बैठक में जानकारी दी गई कि 30 मई 2026 को जिले की सभी पंचायतों में विशेष ग्राम सभा आयोजित होगी। इस दौरान संपूर्ति पोर्टल पर छूटे हुए लाभुकों के नाम जोड़ने और सूची को अपडेट करने का काम किया जाएगा, ताकि आपदा की स्थिति में प्रभावित लोगों को त्वरित राहत राशि उपलब्ध कराई जा सके।

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प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों को बाढ़ और सुखाड़ दोनों स्थितियों के लिए वैकल्पिक फसल योजना तैयार करने का निर्देश दिया। साथ ही नल-जल योजना के अधूरे और छूटे हुए वार्डों में अभियान चलाकर कार्य जल्द पूरा करने को कहा।

अपर समाहर्ता आपदा संतोष कुमार ने पावर पॉइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से जिले की तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि मधुबनी पारंपरिक रूप से आपदा प्रभावित जिला रहा है, जहां लगभग 18 नदियां और उनकी सहायक नदियां गुजरती हैं। जिले की प्रमुख नदियों के जलस्तर की निगरानी हर तीन घंटे पर की जा रही है।

उन्होंने बताया कि मौसम विभाग के अनुसार जून से सितंबर 2026 के बीच सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। इसे देखते हुए सिंचाई और वैकल्पिक खेती की तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जल संसाधन विभाग को नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में बताया गया कि ग्रामीण कार्य विभाग ने 3069 पुल-पुलियों की सफाई पूरी कर ली है। वहीं नौ में से आठ बाढ़ आश्रय स्थल और एसडीआरएफ भवन का निर्माण पूरा हो चुका है।

संभावित बाढ़ से निपटने के लिए जिले में 93 सरकारी नाव उपलब्ध हैं, जिनमें 28 चालू स्थिति में हैं जबकि 22 नावों की मरम्मत की जा रही है। इसके अलावा 41 निजी नाव मालिकों के साथ समझौते की प्रक्रिया चल रही है। जिले में सात मोटरबोट, चार सेटेलाइट फोन और 67 हजार से अधिक पॉलीथिन शीट उपलब्ध हैं।

जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने बताया कि जिले में 242 राहत शिविरों की पहचान की गई है, जहां करीब 97 हजार लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। वहीं 231 स्थानों पर सामुदायिक रसोई की व्यवस्था भी चिन्हित की गई है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए मेडिकल टीमों का गठन कर लिया गया है। मधेपुर, फुलपरास, घोघरडीहा, बिस्फी, मधवापुर, बेनीपट्टी और लौकही जैसे संवेदनशील प्रखंडों में बोट एंबुलेंस के लिए विशेष मेडिकल टीम तैनात की गई है।

बैठक में सांसद रामप्रीत मंडल, विधान परिषद सदस्य घनश्याम ठाकुर समेत कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी सुझाव दिए। प्रभारी मंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से आपसी समन्वय के साथ काम करने की अपील करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयास से आपदा के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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