NEWS PR डेस्क: बिहार के पूर्वी चंपारण में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में निषेध एवं उत्पाद शुल्क विभाग ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए 14 अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। विभागीय जांच में लापरवाही सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई, जिससे उत्पाद विभाग में हड़कंप मच गया है।
निलंबित किए गए अधिकारियों में पुलिस निरीक्षक मनीष सराफ, धर्मेंद्र कुमार, मोहम्मद सेराज अहमद, नागेश, धर्मेंद्र झा, मुकेश कुमार, उदय कुमार, सहायक उप निरीक्षक अजय कुमार, धर्मेंद्र कुमार सिंह, रोशनी कुमारी, बसंत कुमार महतो, कबिंदर कुमार, रंजीत कुमार और शशि ऋषि शामिल हैं।

ज्ञात हो कि अप्रैल महीने में पूर्वी चंपारण के परसोना, गडरिया और बलगंगा गांवों में कथित रूप से मिथाइल अल्कोहल युक्त नकली शराब पीने से 11 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना में करीब 15 लोग बीमार पड़े थे, जिन्हें इलाज के लिए पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर और पटना के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। मामले में पहली मौत 2 अप्रैल को हुई थी। यह वर्ष 2026 में बिहार में जहरीली शराब से जुड़ी तीसरी बड़ी घटना मानी जा रही है।
घटना के बाद पुलिस और उत्पाद विभाग की संयुक्त छापेमारी में 50 जार बरामद किए गए थे, जिनमें कुल 1263 लीटर स्पिरिट भरी हुई थी। इन जारों पर “सुपर पावर AW-68 हाइड्रोलिक ऑयल” का लेबल लगा हुआ था। मामले में तुरकौलिया, रघुनाथपुर, पिपराकोठी और आबकारी थाना क्षेत्रों में सात एफआईआर दर्ज की गईं। 13 नामजद आरोपियों में से 11 को गिरफ्तार किया गया, जबकि दो ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।

जांच के दौरान आबकारी एवं निषेध विभाग के संयुक्त सचिव ने पाया कि जनवरी से मार्च 2026 के बीच अवैध शराब तस्करी से संबंधित एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया था। इसे विभागीय लापरवाही माना गया। इसके बाद निषेध मुख्यालय ने संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन उनके जवाब को अनुशासनात्मक प्राधिकारी ने असंतोषजनक बताते हुए खारिज कर दिया।