NEWS PR डेस्क: आरा, 27 जून। चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि भरत तिवारी के शरीर में कुल पांच गोलियां लगी थीं। इससे पहले पुलिस की ओर से तीन गोलियां लगने की बात कही गई थी, जबकि मृतक के परिजनों, विशेषकर उसकी बहन, का लगातार दावा था कि भरत को पांच गोलियां मारी गई थीं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार पहली गोली बाईं जांघ के ऊपरी हिस्से में सामने से, दूसरी गोली बाईं जांघ के बीच वाले हिस्से के भीतरी भाग में, तीसरी गोली दाईं जांघ के मध्य भाग के अंदरूनी हिस्से में, चौथी गोली दाईं जांघ के बाहरी हिस्से में तथा पांचवीं गोली बाएं पैर के मध्य भाग में पीछे की ओर से लगी थी।
इधर, मामले की जांच के दौरान पुलिस ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी का नाम प्राथमिकी (FIR) से हटा दिया है। दोनों के खिलाफ पहले भरत को संरक्षण देने और अवैध हथियार रखने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं तथा आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। गुरुवार को पुलिस ने दोनों के खिलाफ दर्ज आरोप वापस ले लिए।

उधर, एनकाउंटर की न्यायिक जांच भी शुरू हो गई है। गुरुवार सुबह सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा अपनी जांच टीम के साथ भरत तिवारी के गांव बिलौटी पहुंचे। इस दौरान शाहाबाद रेंज के डीआईजी सत्य प्रकाश, भोजपुर के जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया, पुलिस अधीक्षक राज समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे। जांच दल ने घटनास्थल और संबंधित तथ्यों का जायजा लिया।
भरत तिवारी की मौत को लेकर कथित फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगने के बाद बिहार की राजनीति भी गर्म हो गई है। विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साधते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग कर रहा है। वहीं सरकार का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है।
इस बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया है कि मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
