भरत तिवारी एनकाउंटर केस में बड़ा मोड़, पिता और भाई का नाम एफआईआर से हटाया गया

जांच में नहीं मिले साक्ष्य, भरत तिवारी के पिता और भाई को एफआईआर से मिली राहत

Rashmi Tiwari
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NEWS PR डेस्क: आरा: भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी उर्फ भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में जांच के दौरान बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शाहाबाद डीआईजी की सुपरविजन रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे से नाम हटा दिया है। जांच में दोनों के विरुद्ध कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिलने के बाद उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया। इसकी पुष्टि भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) राज ने की है।


17 जून को हुई थी मुठभेड़
गौरतलब है कि 17 जून को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस कार्रवाई के दौरान भरत भूषण तिवारी की गोली लगने से मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की थीं। पहली प्राथमिकी तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार के बयान पर दर्ज की गई थी, जिसमें भरत तिवारी के अलावा उसके पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपी बनाया गया था।
क्या थे आरोप?
एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि दोनों ने भरत तिवारी को अवैध हथियार रखने में संरक्षण दिया और पुलिस कार्रवाई के दौरान सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने में उसकी सहायता की। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं तथा आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।
जांच में नहीं मिले साक्ष्य
मामले की विस्तृत जांच और शाहाबाद डीआईजी सत्य प्रकाश की सुपरविजन रिपोर्ट में पिता और भाई के खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले। इसके बाद पुलिस ने दोनों का नाम प्राथमिकी से हटा दिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच में यह साबित नहीं हो सका कि दोनों ने भरत तिवारी को अवैध हथियार रखने या पुलिस पर फायरिंग करने में किसी प्रकार का संरक्षण या सहयोग दिया था।
दूसरे मामले में भी मिल सकती है राहत
घटना के बाद सड़क जाम और हंगामे को लेकर दर्ज दूसरी प्राथमिकी की भी समीक्षा की गई। जांच में उस मामले में केवल जमानतीय धाराएं सही पाई गईं, जिससे संबंधित आरोपितों को भी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। इधर, भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच भी जारी है। हाल ही में बिहार राज्य विधि आयोग के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा ने बिलौटी गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि आयोग की नियमित कार्यवाही शुरू होने के बाद पीड़ित पक्ष को समन भेजकर उनका पक्ष सुना जाएगा।
अब आगे क्या?
पिता और भाई का नाम एफआईआर से हटाए जाने के बाद यह मामला नए मोड़ पर पहुंच गया है। अब सभी की नजर न्यायिक जांच और पुलिस की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि 17 जून को बिलौटी गांव में हुई घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और जिम्मेदारी किसकी बनती है।आरा से आकाश कुमार की रिपोर्ट

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