मोदी के हनुमान चिराग ने बढ़ाई BJP की टेंशन, बदल सकता है प्रदेश का सियासी समीकरण

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: लखनऊ/पटना, 07 अप्रैल। बिहार से निकलकर अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में कदम रखने जा रही चिराग पासवान की पार्टी ने बड़ा दांव खेला है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में सभी 403 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है।

पार्टी का यह फैसला साफ संकेत देता है कि अब उसकी रणनीति सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की है। खासकर उत्तर प्रदेश में दलित और युवा वोट बैंक को साधने की कोशिश इस कदम के पीछे मानी जा रही है।

पार्टी के पूर्वी यूपी प्रदेश अध्यक्ष राजीव पासवान ने स्पष्ट किया कि भले ही केंद्र में उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन में है, लेकिन यूपी में वह अकेले चुनाव लड़ेगी। उन्होंने “यूपी फर्स्ट, यूपी वाले फर्स्ट” के एजेंडे के साथ जनता के बीच जाने की बात कही।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चिराग की एंट्री से यूपी का दलित वोट बैंक फिर से चर्चा में आ गया है। फिलहाल इस वर्ग में बहुजन समाज पार्टी की मजबूत पकड़ मानी जाती है, जबकि चंद्रशेखर आजाद भी अपने संगठन के जरिए इस आधार को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना है।

चिराग पासवान, जो इस समय केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार में मंत्री भी हैं, अब यूपी में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश में हैं। लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन और बिहार में मजबूत स्थिति के बाद उनका अगला लक्ष्य पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, रामविलास पासवान के समय से ही उत्तर प्रदेश में एक आधार मौजूद रहा है। अब उसी आधार को फिर से संगठित कर पार्टी को राज्य में एक मजबूत तीसरे विकल्प के रूप में खड़ा करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि चिराग का यह दांव यूपी की सियासत में कितना असर डालता है और किन दलों के समीकरण बिगाड़ता है।

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