JDU के खिलाफ बड़ा सबूत लेकर सदन पहुंचे RJD MLC, शराबबंदी पर खोल दी फंडिंग की फाइल, ‘किंग महेंद्र’ पर बवाल !

Asha Rai
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NEWS PR डेस्क: बिहार विधान परिषद में शराबबंदी के मुद्दे पर जेडीयू और राजद के बीच जोरदार टकराव देखने को मिला। बहस इतनी तीखी हो गई कि सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। बहस की शुरुआत राजद एमएलसी नील कुमार सिंह और जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार के बयान से हुई।

उन्होंने राजद पर शराब माफिया और कंपनियों से चंदा लेने का आरोप लगाया। नीरज कुमार ने कहा कि इलेक्ट्रॉल बॉन्ड लेना अपराध नहीं है, लेकिन बिहार में शराबबंदी लागू रहने के बावजूद शराब कंपनियों से फंड लेना नैतिक सवाल खड़े करता है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजद ने पहले विधानसभा में शराब की होम डिलीवरी का दावा किया था, जो साबित नहीं हो सका। इस पर राजद एमएलसी सुनील कुमार सिंह ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा, “मेरा मुंह मत खुलवाइए,” और फिर ‘किंग महेंद्र’ का नाम लेते हुए दावा किया कि जेडीयू को पांच साल तक हर महीने 99 लाख रुपये चंदा दिया गया। उनके इस बयान के बाद सदन में शोर-शराबा बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए।

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बता दें कि ‘किंग महेंद्र’ से तात्पर्य दिवंगत राज्यसभा सांसद और कारोबारी महेंद्र प्रसाद से है, जिन्हें बिहार में बड़े कारोबारी के रूप में जाना जाता था। सुनील सिंह ने दावा किया कि पांच वर्षों तक हर महीने 99 लाख रुपये दिए गए, जो कुल मिलाकर लगभग 60 करोड़ रुपये होते हैं। उनका आरोप था कि शराबबंदी के नाम पर नैतिकता की बात करने वाली जेडीयू खुद बड़े पैमाने पर चंदा लेती रही है।

सदन के बाहर मीडिया से बातचीत में सुनील सिंह ने कहा कि उनके पास जेडीयू को मिले चंदे के दस्तावेज हैं। उन्होंने A2 बीएस इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी कंपनियों का नाम लेते हुए दावा किया कि एक कंपनी का टर्नओवर 27 करोड़ रुपये था, लेकिन उसने 24 करोड़ रुपये चंदे में दिए। उन्होंने जेडीयू पर “हिरण का चोला पहनकर भेड़िये की तरह काम करने” का आरोप लगाया।

जेडीयू ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया। नीरज कुमार ने कहा कि राजद राजनीतिक लाभ के लिए झूठे आरोप लगा रही है। उन्होंने दोहराया कि बिहार में शराबबंदी नीतीश कुमार सरकार की प्रमुख नीति है और चंदे को लेकर विपक्ष अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दोनों दल एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार और अनैतिक फंडिंग के आरोप लगा रहे हैं। शराबबंदी पर चल रही बहस के बीच चंदे का यह विवाद बिहार की राजनीति में नया मोड़ लेता दिख रहा है। अब देखना होगा कि यह मामला सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहता है या आगे और बड़े खुलासे सामने आते हैं।

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