दिल्ली में सड़क सुरक्षा सम्मेलन 2026: छात्रों को बनाया ‘सेफ्टी एंबेसडर’, जिम्मेदार ड्राइविंग पर जोर

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: नई दिल्ली, 21 मार्च: देश में सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने और युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनाने के उद्देश्य से राजधानी दिल्ली के विवेकानंद स्कूल में ‘सड़क सुरक्षा सम्मेलन 2026’ का आयोजन किया गया। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, शिक्षकों, छात्रों और सामाजिक संगठनों ने भाग लिया।

इस सम्मेलन में कक्षा 3 से 12 तक के करीब 4,000 छात्रों और 100 स्कूलों के 500 से अधिक शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा रहे, जिन्होंने सुरक्षित और स्मार्ट सड़क नेटवर्क के निर्माण पर सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया।

छात्रों ने संभाली जागरूकता की कमान

सम्मेलन की खास बात यह रही कि छात्रों को केवल श्रोता नहीं, बल्कि परिवर्तन के वाहक के रूप में प्रस्तुत किया गया। पोस्टर मेकिंग, नुक्कड़ नाटक, रोल-प्ले, पैनल चर्चा और डॉक्यूमेंट्री निर्माण जैसी गतिविधियों के जरिए बच्चों ने सड़क सुरक्षा के संदेश को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया। उद्देश्य था कि ये छात्र अपने-अपने समुदाय में ‘सड़क सुरक्षा एंबेसडर’ बनकर जागरूकता फैलाएं।

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सरकार का फोकस: सुरक्षित और आधुनिक सड़कें

अपने संबोधन में हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में देश में सड़क बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार हुआ है। उन्होंने बताया कि भारत में अब लगभग 1.46 लाख किलोमीटर लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क विकसित हो चुका है, जो दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्क में शामिल है।

उन्होंने सड़क सुरक्षा के लिए अपनाई जा रही ‘4E रणनीति’—इंजीनियरिंग, प्रवर्तन, शिक्षा और आपातकालीन देखभाल—का भी जिक्र किया और कहा कि लक्ष्य ‘शून्य मृत्यु दर’ हासिल करना है।

तकनीक और सुविधाओं से बढ़ी सुरक्षा

सम्मेलन में बताया गया कि सरकार सड़क सुरक्षा के लिए कई तकनीकी और संरचनात्मक उपाय लागू कर रही है। इनमें एआई-आधारित निगरानी, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम, क्रैश बैरियर, रिफ्लेक्टिव मार्किंग और ब्लैक स्पॉट सुधार जैसे कदम शामिल हैं। साथ ही, दुर्घटना पीड़ितों के लिए राहत योजना के तहत 1.5 लाख रुपये तक की सहायता और बेहतर एम्बुलेंस व ट्रॉमा केयर नेटवर्क भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

व्यवहार में बदलाव पर जोर

मंत्री ने कहा कि सिर्फ कानून या इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि लोगों के व्यवहार में बदलाव भी जरूरी है। हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाना और वाहन चलाते समय मोबाइल से दूरी रखना जैसे छोटे कदम हजारों जानें बचा सकते हैं।

सामूहिक संकल्प के साथ समापन

सम्मेलन के अंत में सभी प्रतिभागियों ने सड़क नियमों का पालन करने और दूसरों को भी जागरूक करने का संकल्प लिया। यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि सुरक्षित सड़कें ही विकसित भारत की मजबूत नींव हैं।

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