जिलाधिकारी द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र सह वनवासी केंद्र अधौरा का बेहतर तरीके से किया गया निरीक्षण

Patna Desk
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कैमूर जिले के जिलाधिकारी द्वारा आज अधौरा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) सह वनवासी सेवा केंद्र (VSK) का औचक निरीक्षण किया गया। यह केंद्र भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत कार्यरत अग्रणी संस्थानों में से एक है, जिसका संचालन और प्रबंधन प्रसिद्ध गैर-सरकारी संगठन वनवासी सेवा केंद्र द्वारा किया जाता है। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने संस्थान के कार्यों, उपलब्ध संसाधनों और ग्रामीण तथा आदिवासी समुदाय के लिए चल रहे कार्यक्रमों की सराहना की।

कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कैमूर की भूमिका KVK कैमूर, किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों से परिचित कराने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने तथा पोषण एवं खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु कार्यरत है। संस्थान स्थानीय जलवायु, मिट्टी, संसाधन और ग्रामीण आवश्यकताओं के अनुरूप कृषि समाधान प्रदान करता है। इसके माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, प्रदर्शन, प्रयोगात्मक परीक्षण और फील्ड विज़िट जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से जानकारी दी जाती है।

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वनवासी सेवा केंद्र (VSK) की पृष्ठभूमि

KVK का मेजबान संस्थान वनवासी सेवा केंद्र है जिसकी स्थापना 1968 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रेरणा से की गई थी। यह संगठन कैमूर के सुदूरवर्ती व पिछड़े वनवासी व आदिवासी क्षेत्र के समग्र विकास हेतु समर्पित है। 1966-67 के सूखा और अकाल राहत कार्यों के दौरान जयप्रकाश जी का ध्यान अधौरा क्षेत्र की बदहाल स्थिति की ओर गया। 1967 में आदिवासी समुदाय पर सरकारी और साहूकारी उत्पीड़न ने उन्हें यह संस्था स्थापित करने हेतु प्रेरित किया।

संस्था की प्रमुख गतिविधियाँ

वनवासी सेवा केंद्र विगत 4 दशकों से आदिवासी क्षेत्रों में कृषि, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वच्छता, सिंचाई, जल प्रबंधन और स्वावलंबन जैसे क्षेत्रों में सक्रिय है। संस्था का उद्देश्य स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग द्वारा आदर्श, आत्मनिर्भर ग्रामों का निर्माण करना है।

निरीक्षण के मुख्य बिंदु

जिलाधिकारी सुनील कुमार ने संस्थान के अनुसंधान फार्म, प्रशिक्षण हॉल, महिला कृषकों के लिए आयोजित कार्यक्रम, डेयरी व बागवानी इकाइयों का निरीक्षण किया।

उन्होंने उपस्थित वैज्ञानिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से बातचीत कर कार्यों की प्रगति की जानकारी ली।

जिलाधिकारी ने कहा कि “केवीके और वनवासी सेवा केंद्र जैसी संस्थाएं ग्रामीण परिवर्तन की रीढ़ हैं। इनका योगदान न केवल कृषि क्षेत्र में है, बल्कि सामाजिक जागरूकता और आत्मनिर्भरता में भी है।”

वनवासी सेवा केंद्र की संरचना और क्षमता

कर्मचारी संख्या: 100+ (कृषि वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर, सामाजिक कार्यकर्ता आदि)

प्रबंधन समिति: 7 आजीवन सदस्य और 14 साधारण सदस्य सहित कुल 21 सदस्यीय कार्यकारी समिति कार्यालय: अधौरा (मुख्यालय) के अलावा तिलौथू, नौहट्टा, सासाराम और भभुआ में उपकेंद्र

क्षेत्र: बिहार राज्य के आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों में कार्यरत

जिलाधिकारी सुनील कुमार का संदेश

जिलाधिकारी ने यह भी सुझाव दिया कि संस्थान अपने प्रयासों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आम जनता तक पहुँचाने के लिए कार्य करें ताकि तकनीकी जानकारी हर किसान तक समय पर पहुंचे। साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

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