बिहार में चुनावी सरगर्मी तेज, एनडीए ने बूथ स्तर तक तेज किया जनसंपर्क अभियान

Jyoti Sinha
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बिहार में जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, राजनीतिक गतिविधियां तेज़ होती जा रही हैं। एनडीए और महागठबंधन के बीच मुकाबले की तैयारियां अपने चरम पर हैं, वहीं बसपा, जनसुराज, आम आदमी पार्टी और अन्य दलों ने भी चुनावी मैदान में उतरने की घोषणा कर दी है। इस माहौल में एनडीए ने अपने गठबंधन को मज़बूत करने की रणनीति पर सक्रियता से काम शुरू कर दिया है।

राज्य से लेकर बूथ स्तर तक बनाई जा रही रणनीति

एनडीए ने राज्य स्तरीय समन्वय समिति का गठन कर संगठन को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसके साथ ही बूथ स्तर तक नेटवर्क को दुरुस्त करने की प्रक्रिया भी चल रही है। वर्तमान में एनडीए से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं को यह ज़िम्मेदारी दी गई है कि वे सरकारी योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाएं

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सूत्रों के अनुसार, एनडीए कार्यकर्ता जिला, प्रखंड, पंचायत और बूथ स्तर तक जाकर ‘सात निश्चय योजना’ और राज्य सरकार की अन्य प्रमुख उपलब्धियों को आम लोगों के बीच ले जा रहे हैं। इस अभियान का उद्देश्य है कि जनता को सरकार की विकास योजनाओं से अवगत कराया जाए और भविष्य में समर्थन हासिल किया जा सके।

मतदाताओं को वर्ग के अनुसार किया गया विभाजित

एनडीए की रणनीति में मतदाताओं को विभिन्न सामाजिक वर्गों के आधार पर विभाजित कर टारगेट किया जा रहा है। यदि किसी इलाके में महिला मतदाता अधिक हैं, तो वहां महिला नेताओं और महिला कार्यकर्ताओं की विशेष टीम जाकर संवाद कर रही है। इसी प्रकार, अतिपिछड़ा, पिछड़ा, अल्पसंख्यक या सवर्ण वर्ग के क्षेत्रों में संबंधित समुदायों से आने वाले कार्यकर्ताओं को भेजा जा रहा है, ताकि स्थानीयता और विश्वसनीयता बनी रहे।

महिला आरक्षण नीति पर जोर

हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में लिए गए महिला आरक्षण से जुड़े फैसले की जानकारी भी डोर-टू-डोर अभियान के जरिए महिलाओं तक पहुंचाई जा रही है। एनडीए की महिला कार्यकर्ता यह समझा रही हैं कि अब सरकारी नौकरियों में 35% आरक्षण का लाभ विशेष रूप से बिहार की मूल निवासी महिलाओं को मिलेगा। यह प्रावधान बाहर से आने वाले उम्मीदवारों पर रोक लगाकर स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता देगा।

एनडीए का कहना है कि यह निर्णय महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और सम्मानजनक जीवन जीने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह पहल नीतीश सरकार की महिला केंद्रित नीतियों का हिस्सा है, जिसमें सशक्तिकरण, रोजगार और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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