बिहार विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के लिए चुनाव आयोग की कड़ी चेतावनी

Jyoti Sinha
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बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर चुनावी खर्च पर सख्ती बरती जा रही है। चुनाव आयोग ने सभी उम्मीदवारों और उनके एजेंटों को स्पष्ट संदेश दिया है कि चुनावी खर्च में कोई भी लापरवाही या गड़बड़ी महंगी पड़ सकती है। इस मामले में आयोग ने व्यय प्रेक्षकों के माध्यम से उम्मीदवारों को कड़ी चेतावनी दी है।

हर खर्च का पूरा हिसाब रखना अनिवार्य

व्यय प्रेक्षक आईआरएस नेहा और वीजी शेषाद्री ने कहा कि नामांकन की तिथि से लेकर परिणाम घोषित होने तक सभी खर्चों का विस्तृत लेखा-जोखा रखना उम्मीदवारों के लिए अनिवार्य होगा। चुनाव आयोग इस मामले में बेहद गंभीर है और किसी भी अनियमितता या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा।

अलग बैंक खाता जरूरी

चुनावी खर्च की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर प्रत्याशी को विशेष चुनावी बैंक खाता खोलना होगा। नियम है कि 10,000 रुपए से अधिक का कोई भी भुगतान केवल अकाउंट-पेई चेक के माध्यम से ही किया जाएगा। नकद लेन-देन की सीमा बहुत सीमित रखी गई है ताकि काले धन के इस्तेमाल पर रोक लग सके। व्यय प्रेक्षकों ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था चुनाव में धनबल के दुरुपयोग को रोकने के लिए है।

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तीन रंग का विशेष रजिस्टर

इस बार प्रत्याशियों को तीन हिस्सों वाले रजिस्टर में खर्च का लेखा-जोखा रखना होगा। रजिस्टर के पन्ने तीन रंगों में विभाजित हैं:

  • सफेद पेज – दैनिक खर्चों का विवरण, जैसे पोस्टर छपवाने या सभा में पानी की व्यवस्था।
  • गुलाबी पेज – नकद लेन-देन का पूरा हिसाब, हर नकद भुगतान की रसीद और विवरण दर्ज करना अनिवार्य।
  • पीला पेज – बैंक के माध्यम से होने वाले सभी खर्चों का लेखा-जोखा, जिसमें चेक नंबर और भुगतान का उद्देश्य शामिल।

इस रजिस्टर को नामांकन दाखिल करने की तिथि से लेकर चुनाव परिणाम घोषित होने तक रोजाना अपडेट करना होगा, ताकि सभी खर्चों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

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