बोधगया बना वैश्विक आस्था का केंद्र, 2570वीं बुद्ध जयंती पर उमड़ा जनसैलाब

बोधगया से गूंजा विश्व शांति का स्वर, बुद्ध पूर्णिमा पर एकता का महापर्व

Rashmi Tiwari

बोधगया की पावन धरती शुक्रवार को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर आध्यात्मिक ऊर्जा से जगमगा उठी। भगवान बुद्ध की 2570वीं जयंती के इस ऐतिहासिक अवसर पर देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने इसे वैश्विक आस्था और शांति का भव्य उत्सव बना दिया। सुबह की शुरुआत प्रभात फेरियों, मंत्रोच्चार और रंग-बिरंगी झांकियों के साथ हुई। महाबोधि महाविहार परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा, जहां हर व्यक्ति बुद्ध के जीवन के तीन महत्वपूर्ण पड़ाव—जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण—को एक साथ स्मरण करता नजर आया।
थाईलैंड, जापान, श्रीलंका और म्यांमार जैसे देशों से आए भिक्षु पारंपरिक वेशभूषा में शांति और करुणा का संदेश देते हुए शोभायात्राओं में शामिल हुए। पूरा शहर “बुद्धमय” वातावरण में डूब गया, मानो विश्व एक सूत्र में बंध गया हो। आयोजन को और बेहतर बनाने के लिए बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी ने व्यापक व्यवस्थाएं कीं। गया जंक्शन से बोधगया तक मुफ्त बस सेवा, मेडिकल कैंप, शीतल पेयजल, और श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की विशेष व्यवस्था की गई। भीषण गर्मी को देखते हुए कूलर, पंखे और बड़े हैंगर लगाए गए।
1 मई को होने वाले मुख्य समारोह और संघदान कार्यक्रम को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। करीब 10 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इस दौरान सम्राट चौधरी, जीतनराम मांझी, और प्रेम कुमार भारत में थाईलैंड की काउंसल जनरल सिरिपोर्न थान्यातेप सहित कई गणमान्य व्यक्तियों के आगमन को लेकर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। इस वैश्विक आयोजन के बीच बोधगया एक बार फिर दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि संघर्षों के दौर में भी शांति, सहअस्तित्व और करुणा ही मानवता का सच्चा मार्ग है। बुद्ध की यह पावन भूमि न केवल बिहार, बल्कि पूरे विश्व के लिए प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है।
वहीं भिक्षु आर्यपाल ने कहा कि बुद्ध जयंती काफी महत्पूर्ण है। यह दिन विशेष इसलिए भी है क्योंकि भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान और परिनिर्वाण तीनों इसी दिन हुए। यह एक अद्भुत संयोग है। उन्होने कहा कि थाईलैंड से आए बौद्ध भिक्षुओं में खास उत्साह है। बोधगया भगवान बुद्ध की भक्ति में आज लीन है। हम सभी बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए यह दिन खास है।
गया से आशिष कुमार की रिपोर्ट

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