NEWS PR डेस्क: पटना, 29 मई। बिहार भाजपा में इन दिनों एक बड़ा राजनीतिक सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि पार्टी वरिष्ठ नेता संजय मयूख को तीसरी बार विधान परिषद भेजेगी या फिर उन्हें बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार बनाएगी। दोनों संभावनाओं को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं।
भाजपा की परंपरा रही है कि किसी नेता को सामान्यतः दो बार ही विधान परिषद भेजा जाता है। हालांकि पार्टी समय-समय पर कुछ खास नेताओं के लिए इस परंपरा में बदलाव भी करती रही है। पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद और मंत्री मंगल पांडेय जैसे नेताओं को भाजपा तीन-तीन बार विधान परिषद भेज चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी अगर चाहे तो संजय मयूख के मामले में भी यह परंपरा तोड़ सकती है।

संजय मयूख को भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के करीबी नेताओं में गिना जाता है। राजनीतिक हलकों में उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और वरिष्ठ भाजपा नेता राजनाथ सिंह का विश्वासपात्र माना जाता है। पार्टी संगठन और मीडिया प्रबंधन में उनकी सक्रिय भूमिका ने उन्हें भाजपा के अंदर मजबूत पहचान दिलाई है।
दूसरी ओर, बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले संभावित उपचुनाव ने भी राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हुई है और माना जा रहा है कि जुलाई या अगस्त 2026 में यहां उपचुनाव कराया जा सकता है। चूंकि नितिन नवीन कायस्थ समुदाय से आते हैं, इसलिए भाजपा इस सीट पर फिर से किसी कायस्थ चेहरे को मौका दे सकती है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा पटना शहरी क्षेत्र में जातीय समीकरण को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहेगी। कुम्हरार विधानसभा सीट पर 2025 में कायस्थ नेता अरुण कुमार सिन्हा का टिकट काटे जाने से समुदाय में नाराजगी की चर्चा हुई थी। हालांकि चुनाव में समुदाय का समर्थन भाजपा के साथ बना रहा, लेकिन पार्टी अब बांकीपुर में ऐसा प्रयोग करने से बचना चाहेगी।
पटना महानगर और पटना साहिब संसदीय क्षेत्र में कायस्थ मतदाताओं की अच्छी संख्या को देखते हुए भाजपा इस वर्ग को नाराज नहीं करना चाहेगी। ऐसे में संजय मयूख का नाम स्वाभाविक रूप से सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल माना जा रहा है।
संजय मयूख की राजनीतिक यात्रा भी संघर्ष और संगठनात्मक मेहनत की कहानी मानी जाती है। उन्होंने एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में राजनीति शुरू की थी। शुरुआती दिनों में वे भाजपा की प्रेस विज्ञप्तियां अखबार कार्यालयों तक पहुंचाने का काम करते थे। बाद में वे प्रदेश उपाध्यक्ष, मीडिया प्रभारी और फिर राष्ट्रीय सह मीडिया प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचे।
2013 में तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने उन्हें राष्ट्रीय सह मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी। इसी दौर में राष्ट्रीय राजनीति में नरेंद्र मोदी और अमित शाह का प्रभाव तेजी से बढ़ा। संगठन में सक्रियता और मीडिया प्रबंधन की क्षमता के कारण संजय मयूख शीर्ष नेतृत्व की नजर में आए।
इसके बाद 2016 में भाजपा ने उन्हें पहली बार बिहार विधान परिषद भेजा। 2022 में उन्हें दूसरी बार एमएलसी बनाया गया। अब सवाल यह है कि पार्टी उनके अनुभव का उपयोग विधान परिषद में करना चाहेगी या उन्हें सीधे चुनावी राजनीति में उतारेगी।
हालांकि बांकीपुर सीट के लिए भाजपा के पास अन्य कायस्थ नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। इनमें बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष रणवीर नंदन, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. अजय आलोक और पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय सचिव ऋतुराज सिन्हा प्रमुख माने जा रहे हैं।
अब अंतिम फैसला भाजपा नेतृत्व को करना है। पार्टी संजय मयूख को संगठन और विधान परिषद की राजनीति में बनाए रखती है या फिर उन्हें बांकीपुर की चुनावी लड़ाई में उतारती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।