NEWS PR डेस्क:नेपाल में गंडक नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में फ्लैश फ्लड की स्थिति उत्पन्न होने तथा गंडक नदी में अचानक जलप्रवाह बढ़ने की संभावना के मद्देनजर राज्य में संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा बाढ़ पूर्व तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। स्वास्थ्य विभाग के सभागार में आयोजित इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने की।

बैठक में स्वास्थ्य मंत्री को राज्य के बाढ़ संभावित जिलों में आमजन की सुरक्षा, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था तथा संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए तैयार किए गए माइक्रो प्लान (Micro Plan) की विस्तृत जानकारी दी गई। समीक्षा के दौरान बाढ़ प्रभावित होने की संभावना वाले प्रमुख छह जिलों—पश्चिमी चंपारण (बेतिया), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर एवं वैशाली—में विशेष सतर्कता बरतने पर जोर दिया गया। इसके अतिरिक्त सीतामढ़ी, शिवहर एवं अन्य संवेदनशील जिलों की स्थिति पर भी निरंतर नजर रखने का निर्देश दिया गया।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय, विशेष सचिव अरविंद कुमार वर्मा, बीएमएसआईसीएल (BMSICL) के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन, मंत्री के आप्त सचिव कौशलेंद्र कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग, राज्य स्वास्थ्य समिति एवं बीएमएसआईसीएल के कई वरिष्ठ अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा एवं गर्भवती महिलाओं की लाइन लिस्टिंग
समीक्षा बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देश दिया कि आपदा के समय सबसे अधिक जोखिम वाले वर्गों—गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, नवजात शिशुओं, बुजुर्गों तथा गंभीर असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों—पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाए।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा आशा (ASHA) एवं एएनएम (ANM) के माध्यम से बाढ़ संभावित क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं की लाइन लिस्टिंग (Line Listing) पूरी कर ली गई है। सूची में प्रत्येक गर्भवती महिला की संभावित प्रसव तिथि (Expected Date of Delivery) को विशेष रूप से चिन्हित किया गया है।
जिन महिलाओं का प्रसव बाढ़ के महीनों के दौरान संभावित है, उन्हें बाढ़ आने से पूर्व ही निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) अथवा सुरक्षित प्रसव गृहों में स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जाएगी। इस कार्य में समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत आईसीडीएस (ICDS) एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ निरंतर अंतर-विभागीय समन्वय स्थापित कर कार्य किया जा रहा है।
दुर्गम एवं जलमग्न क्षेत्रों के लिए बोट एम्बुलेंस की व्यवस्था
बाढ़ के दौरान कई गांव पूरी तरह जलमग्न हो जाते हैं अथवा टापू जैसे क्षेत्रों में बदल जाते हैं। ऐसे क्षेत्रों के ग्रामीण कई बार अपने जान-माल, घर एवं मवेशियों की देखभाल के कारण राहत शिविरों में जाने से कतराते हैं। ऐसी स्थिति में प्रभावित लोगों तक उनके निवास स्थल के निकट ही स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए बोट एम्बुलेंस अथवा नौका औषधालय की व्यवस्था की गई है।
इन नौकाओं पर योग्य डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, आवश्यक जीवनरक्षक दवाएं एवं फर्स्ट-एड किट उपलब्ध रहेंगी। आपदा प्रबंधन विभाग एवं स्थानीय जिला प्रशासन के सहयोग से नौकाओं के अधिग्रहण, भाड़ा निर्धारण तथा परिचालन की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
इसके अतिरिक्त, राज्य भर के प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 102 एम्बुलेंस सेवा को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि गंभीर मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाया जा सके।
60 आवश्यक दवाओं एवं जीवनरक्षक टीकों का पर्याप्त बफर स्टॉक
बाढ़ संभावित जिलों में मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार बीएमएसआईसीएल (BMSICL) के माध्यम से 60 मुख्य आवश्यक एवं जीवनरक्षक दवाओं तथा टीकों का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध कराया गया है। बाढ़ के दौरान सर्पदंश की आशंका को देखते हुए एंटी-स्नेक वेनम (Anti-Snake Venom-ASV) की व्यवस्था की गई है। वहीं, कुत्ते एवं विषैले जीवों के काटने के उपचार के लिए एंटी-रेबीज वैक्सीन (Anti-Rabies Vaccine-ARV) का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया गया है।
दस्त, डायरिया एवं डिहाइड्रेशन से बचाव और उपचार के लिए ओआरएस (ORS) एवं जिंक टैबलेट्स उपलब्ध कराई गई हैं। पेयजल को कीटाणुरहित एवं शुद्ध बनाने के लिए हैलाजोन गोलियों (Halazone Tablets) की व्यवस्था की गई है।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद क्षेत्रों में कीटाणुशोधन तथा महामारी की रोकथाम के लिए ब्लीचिंग पाउडर एवं चूना (Lime Powder) उपलब्ध रहेगा। इसके अतिरिक्त बुखार, जलजनित रोगों, त्वचा संक्रमण एवं चोट के उपचार के लिए पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स तथा आवश्यक मलहम का पर्याप्त स्टॉक रखा गया है।
राहत शिविरों एवं सामुदायिक रसोई के निकट अस्थायी चिकित्सा शिविर
बाढ़ के कारण विस्थापन की स्थिति में प्रभावित आबादी के लिए स्थापित किए जाने वाले राहत शिविरों तथा राज्य सरकार द्वारा संचालित सामुदायिक रसोईघरों के समीप अनिवार्य रूप से अस्थायी चिकित्सा शिविर स्थापित किए जाएंगे।
सामुदायिक रसोई स्थलों पर आने वाले नागरिकों के स्वास्थ्य की नियमित जांच की जाएगी। साथ ही वहां स्वच्छ भोजन एवं शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्था की जाएगी।
महामारी एवं संक्रामक रोगों की रोकथाम पर विशेष जोर
बाढ़ का पानी उतरने के बाद डायरिया, हैजा, त्वचा रोग, मलेरिया एवं डेंगू जैसी बीमारियों के फैलने की संभावना बढ़ जाती है। इसे देखते हुए जलजमाव वाले स्थानों एवं प्रभावित गांवों में ब्लीचिंग पाउडर और चूने का छिड़काव युद्धस्तर पर सुनिश्चित किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा संभावित महामारी एवं संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए जिला स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था की निरंतर निगरानी की जाएगी तथा आवश्यकता के अनुसार त्वरित चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य संबंधी कार्रवाई की जाएगी।
आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ त्रिस्तरीय समन्वय
बाढ़ एवं अन्य आपदा की स्थिति में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम (NDMA Act) तथा राज्य आपदा प्रबंधन नीति के तहत स्वास्थ्य विभाग संबंधित एजेंसियों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित रखेगा।
आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था के तहत एसडीआरएफ (प्रथम रिस्पांस), एनडीआरएफ (द्वितीय रिस्पांस) तथा आवश्यकता पड़ने पर थल सेना (तृतीय रिस्पांस) के साथ समन्वय स्थापित कर प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सभी तैयारियों को समयबद्ध एवं प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में प्रभावित नागरिकों को तत्काल और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।