बिहार में 27 जिलों में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन की स्थापना, अनफिट वाहनों पर सख्ती लागू होगी

Neha Nanhe
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NEWS PR डेस्क : बिहार की सड़कों पर अनफिट वाहनों के परिचालन पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। परिवहन विभाग ने 27 जिलों में नए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) स्थापित करने का निर्णय लिया है। विभाग ने एजेंसियों से आवेदन आमंत्रित किए हैं और योजना है कि इसी साल चयन प्रक्रिया पूरी कर केंद्रों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।

सरकार का उद्देश्य सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देना और दुर्घटनाओं की संख्या में कमी लाना है। एटीएस पूरी तरह से मशीन आधारित फिटनेस जांच करते हैं, जिनमें ब्रेक, स्टीयरिंग, सस्पेंशन, टायर, हेडलाइट्स जैसे 30 से अधिक सुरक्षा मानकों की जांच की जाती है। इसके अलावा, वाहनों से निकलने वाले धुएं की भी कंप्यूटरीकृत जांच की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वाहन पर्यावरण मानकों का पालन कर रहा है या नहीं।

परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी खराबियों, जैसे ब्रेक फेल होने या स्टीयरिंग में गड़बड़ी की वजह से सड़क हादसों की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसलिए अनफिट वाहनों को सड़कों से हटाना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है। वर्तमान में राज्य में आठ एटीएस संचालित हो रहे हैं, जिनमें पटना में तीन, और दरभंगा, भागलपुर, हाजीपुर, नालंदा, सासाराम में एक-एक केंद्र मौजूद हैं।

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नियम के अनुसार, नई गाड़ियों को दो साल बाद पहली फिटनेस जांच करानी होती है, और आठ साल से अधिक पुरानी व्यावसायिक गाड़ियों को हर साल फिटनेस सर्टिफिकेट लेना जरूरी होता है। एक वाहन की फिटनेस जांच में औसतन 15 मिनट का समय लगता है, जिससे अगर केंद्र 24 घंटे भी काम करें, तो अधिकतम 100 वाहनों की जांच संभव हो सकती है।

केंद्रों की कार्यप्रणाली पर सवाल
हालांकि, कुछ केंद्रों पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि जानकारी के मुताबिक कई एटीएस केंद्र प्रतिदिन 250 से 300 वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर रहे हैं, जो तकनीकी रूप से संभव नहीं है। इससे केंद्रों की कार्यप्रणाली पर संदेह जताया जा रहा है। आरोप है कि स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के कारण कई केंद्र मनमाने तरीके से कार्य कर रहे हैं, जिससे अनफिट गाड़ियों का परिचालन जारी है और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है।

नए केंद्रों से होगी निगरानी में सुधार
नए एटीएस केंद्रों की स्थापना से विभाग का मानना है कि अधिक जिलों में वाहनों की जांच प्रक्रिया विकेंद्रीकृत होगी, जिससे निगरानी में सुधार आएगा और फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने में पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे अनफिट वाहनों पर प्रभावी रोक लगेगी और सड़क सुरक्षा में सुधार होगा।

सड़क दुर्घटनाओं पर पड़ेगा सकारात्मक असर
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एटीएस की निगरानी कड़ी की जाए और जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाए, तो सड़क दुर्घटनाओं में काफी कमी लाई जा सकती है। राज्य में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं के मद्देनजर, यह कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

मौजूदा केंद्रों पर भी होगी कड़ी निगरानी


विभाग ने संकेत दिया है कि नए केंद्रों के अलावा, मौजूदा एटीएस की भी विशेष ऑडिट कराई जाएगी। यदि गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस पहल से सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल फिट और सुरक्षित वाहन ही राज्य की सड़कों पर चलें, जिससे आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

नए केंद्रों में ये जिलें होंगे शामिल
नए एटीएस केंद्रों की स्थापना जिन 27 जिलों में होगी, उनमें मुंगेर, जमुई, शेखपुरा, बांका, अररिया, शिवहर, नवादा, सहरसा, किशनगंज, वैशाली, नालंदा, सारण, बेगूसराय, लखीसराय, बेतिया, मधेपुरा, अरवल, खगड़िया, औरंगाबाद, सीतामढ़ी, जहानाबाद, कटिहार, रोहतास, सुपौल, समस्तीपुर, सीवान और दरभंगा शामिल हैं।

इस कदम से उम्मीद है कि बिहार की सड़कों पर केवल फिट और सुरक्षित वाहन ही चलेंगे, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और आम जन की सुरक्षा बढ़ेगी।

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