NEWS PR डेस्क: पटना, 15 जुलाई। दुष्कर्म के प्रयास (Attempt to Rape) से जुड़े एक मामले में पटना हाई कोर्ट के हालिया फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को सुनवाई के दौरान संकेत दिया कि वह इस आदेश पर विस्तृत टिप्पणी करेगी। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन भी शामिल थे।
सुनवाई उस स्वत: संज्ञान (सुओ मोटू) मामले में हो रही थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक विवादित फैसले के बाद शुरू किया था। उसी मामले में शीर्ष अदालत ने यौन अपराधों की सुनवाई के दौरान न्यायिक संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी को दिशा-निर्देश तैयार करने का निर्देश दिया था।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने अदालत का ध्यान पटना हाई कोर्ट के 9 जुलाई के फैसले की ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के विवादित फैसले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बावजूद पटना हाई कोर्ट ने लगभग समान परिस्थितियों में वैसी ही टिप्पणियां की हैं। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि शीर्ष अदालत के स्पष्ट रुख के बाद भी इस तरह के आदेश सामने आ रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फूलका ने भी इस मुद्दे पर उनका समर्थन किया।

इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि “कई बार पर्याप्त शोध और कानूनी अध्ययन के अभाव में ऐसे फैसले सामने आ जाते हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि पटना हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट भी विस्तृत आदेश पारित करेगा।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला बिहार के बांका जिले के अमरपुर थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, वर्ष 2008 में पीड़िता अपने पिता के साथ एक स्टूडियो में फोटो खिंचवाने गई थी। आरोप है कि स्टूडियो संचालक हिमांशु पाठक उर्फ मिथिया ने युवती के पिता को बाहर बैठा दिया और पीड़िता को कमरे के अंदर ले जाकर दरवाजा बंद कर लिया।
शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने दुष्कर्म की नीयत से पीड़िता का सलवार उतारने की कोशिश की और उसके सीने को दबाकर शारीरिक छेड़छाड़ की। पीड़िता के शोर मचाने पर उसके पिता दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंचे, जिसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। इस संबंध में अमरपुर थाना में कांड संख्या 14/2008 दर्ज किया गया था।
बांका के अपर सत्र न्यायाधीश-1 ने एक नवंबर 2023 को आरोपी को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपी ने पटना हाई कोर्ट में अपील दायर की।
पटना हाई कोर्ट ने क्या कहा था ?
न्यायमूर्ति पूर्णेंदु सिंह की एकल पीठ ने 9 जुलाई को निचली अदालत का फैसला पलटते हुए आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अपने आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि “किसी महिला का सलवार उतारने की कोशिश करना और उसके सीने को दबाकर शारीरिक छेड़छाड़ करना दुष्कर्म का प्रयास (Attempt to Rape) नहीं माना जा सकता।”
अदालत ने यह भी कहा कि मामले में ऐसे पर्याप्त चिकित्सीय (मेडिकल) और अन्य साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं, जिनके आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि आरोपी ने दुष्कर्म का प्रयास किया था। साथ ही अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हुआ। अब इसी फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
