पूर्णिया एयरपोर्ट से शुरू हुई वाणिज्यिक उड़ानें, सीमांचल को मिली नई हवाई पहचान

Jyoti Sinha
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बिहार में विकास के वादों की तस्वीर अब ज़मीन पर उतरने लगी है। सोमवार को पूर्णिया एयरपोर्ट से वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत के साथ ही राज्य को हवाई कनेक्टिविटी का बड़ा तोहफ़ा मिला। उद्घाटन दिवस पर इंडिगो की फ्लाइट कोलकाता और स्टार एयर की फ्लाइट अहमदाबाद के लिए रवाना हुईं। यह सिर्फ़ उड़ान नहीं, बल्कि सीमांचल की दिशा और दशा बदलने वाला कदम माना जा रहा है।76-सीटर विमानों के परिचालन के साथ ही पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जैसे ज़िले अब सीधे देश के बड़े शहरों से जुड़ गए हैं।

इसके साथ ही बिहार के चार प्रमुख एयरपोर्ट—पटना, गया, दरभंगा और पूर्णिया—पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं।आंकड़े बताते हैं कि 15 सितंबर तक बिहार से रोज़ाना 89 फ्लाइट्स संचालित हो रही थीं, जिनसे लगभग 12,900 यात्री सफ़र कर रहे थे। अब पूर्णिया एयरपोर्ट के जुड़ने से यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।पटना एयरपोर्ट राज्य का सबसे व्यस्त केंद्र है, जहां हर रोज़ औसतन 10,464 यात्री और 71 उड़ानें दर्ज होती हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और पुणे तक सीधी उड़ानें यहां से मिलती हैं। जल्द ही यहां से अंतरराष्ट्रीय सेवाएं और काठमांडू कनेक्शन भी शुरू होगा।

दरभंगा एयरपोर्ट ने मिथिला और उत्तर बिहार को नई पहचान दी है। यहां से रोज़ाना 14 फ्लाइट्स और 2200 यात्री यात्रा करते हैं।गया एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय यात्रियों का प्रमुख द्वार है। प्रतिदिन लगभग 900 यात्री यहां से उड़ान भरते हैं। हाल ही में दिल्ली रूट पर एयर इंडिया सेवा शुरू होने से औरंगाबाद व नवादा जैसे इलाक़ों को भी राहत मिली है।इस बार सुर्ख़ियों का केंद्र है पूर्णिया एयरपोर्ट, जिसने सीमांचल की लंबी दूरी की समस्या को हल करना शुरू कर दिया है।

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उद्घाटन के पहले ही दिन 150 सीट क्षमता जुड़ी और जल्द ही नए रूट्स की घोषणा होगी। इससे कृषि, कारोबार, शिक्षा और पर्यटन को नई उड़ान मिलेगी।सबसे बड़ी राहत यह कि अब सीमांचल के लोगों की बागडोगरा एयरपोर्ट पर निर्भरता घट जाएगी। पूर्णिया से ही दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद जैसे महानगरों तक सीधा सफ़र संभव होगा।सरकार ने यहां से आगे बढ़ते हुए भागलपुर, मुंगेर, बिरपुर, सहरसा और वाल्मीकिनगर में पांच नए एयरपोर्ट्स के लिए सर्वे प्रक्रिया तेज़ कर दी है। अगर यह योजना पूरी हुई, तो बिहार की हवाई तस्वीर बदल जाएगी और आगामी चुनावों में ‘एयर कनेक्टिविटी कार्ड’ सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार साबित हो सकता है।

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