‘क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप’ की उच्चस्तरीय बैठक संपन्न: पीएनजी कार्यों की धीमी प्रगति पर मुख्य सचिव सख्त, कंपनियों को दी चेतावनी

सीएमजी की बैठक में विकास आयुक्त, अपर मुख्य सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक के साथ-साथ कृषि, स्वास्थ्य, नगर विकास एवं आवास, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, सहकारिता, श्रम संसाधन, ऊर्जा, परिवहन तथा आपदा प्रबंधन विभागों के प्रधान सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी मौजूद थे। इस बैठक में प्रमुख तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया । विदित हो खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग को इस विशेष समूह का नोडल विभाग नामित किया गया है।

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना, 06 अप्रैल। राज्य के मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में ‘क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप’ (सीएमजी) की एक महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को आयोजित की गई। जिसमें राज्य की वर्तमान आपूर्ति व्यवस्था और बुनियादी ढांचा की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने राज्य में पीएनजी पाइपलाइन कार्यों की धीमी गति पर गहरी असंतुष्टि व्यक्त की और सभी तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों को सख्त निर्देश दिया कि वे धरातल पर उतरकर ‘मिशन मोड’ में काम करना सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में कोताही बरती गई, तो संबंधित कंपनी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सीएमजी की बैठक में विकास आयुक्त, अपर मुख्य सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक के साथ-साथ कृषि, स्वास्थ्य, नगर विकास एवं आवास, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, सहकारिता, श्रम संसाधन, ऊर्जा, परिवहन तथा आपदा प्रबंधन विभागों के प्रधान सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी मौजूद थे। इस बैठक में प्रमुख तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया । विदित हो खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग को इस विशेष समूह का नोडल विभाग नामित किया गया है।

बिहार के विभिन्न जिलों में तेल कंपनियों (आईओसीएल, बीपीसीएल, एचपीसीएल, जीएआईएल और थिंक गैस द्वारा घरेलू पीएनजी कनेक्शन देने की प्रगति की समीक्षा की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पटना और मुजफ्फरपुर जैसे कुछ जिलों को छोड़कर, अधिकांश क्षेत्रों में लक्ष्य की तुलना में वास्तविक कनेक्शनों की संख्या काफी कम है। कई स्थानों पर भूमि आवंटन में देरी और ‘पेसो’ अनुमोदन की प्रतीक्षा जैसी तकनीकी बाधाएं हैं।

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मुख्य सचिव ने नोडल विभाग को निर्देशित किया है कि वे तेल कंपनियों की प्रगति का निरंतर अनुगमन करें और प्रत्येक सोमवार को विस्तृत रिपोर्ट उनके समक्ष प्रस्तुत करें। साथ ही, सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और प्रभारी सचिवों को भी आदेश दिया गया है कि वे अपने आवंटित जिलों का नियमित भ्रमण करें और वहां तैनात ठेकेदारों तथा जनशक्ति (मैनपावर) की उपलब्धता की भौतिक जांच करें।

बैठक में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव द्वारा एलपीजी सिलेंडर के बैकलॉग की स्थिति पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें विशेष रूप से अरवल, गया, कैमूर, रोहतास, सारण और पश्चिमी चंपारण जिलों में बैकलॉग की समस्या को रेखांकित किया गया। बैठक में यह भी बताया गया कि जिलों में स्थापित कंट्रोल रूम शिकायतों का दैनिक आधार पर निपटारा कर रहे हैं और पिछले पांच दिनों में कुल 800 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। अब तक राज्य भर में जिलाधिकारियों द्वारा कुल 22,878 सघन निरीक्षण किए जा चुके हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई सिलेंडर जब्त किए गए हैं और प्राथमिकी भी दर्ज की गई हैं। तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि अब लगभग 90 प्रतिशत सिलेंडरों की डिलीवरी केवल पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी के माध्यम से ही की जा रही है और सुरक्षा की दृष्टि से वैकल्पिक मोबाइल नंबर के विकल्प को काफी हद तक समाप्त कर दिया गया है।

श्रम संसाधन विभाग द्वारा बताया गया कि मिडिल ईस्ट और अन्य राज्यों में फंसे बिहार के श्रमिकों की सहायता हेतु राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम फोन संख्या 0612-2520053 और व्हाट्सएप संख्या- 7368855002 जारी कर दिया गया है। साथ ही नोडल पदाधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी गई है। पीएनजी कार्यों में तेजी लाने के लिए पटना, लखीसराय और मुंगेर जैसे जिलों में पीएचईडी प्लंबरों और आईटीआई छात्रों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। होटलों और उद्योगों की साप्ताहिक आवश्यकता का वर्तमान में 70 प्रतिशत आपूर्ति पूरी की जा रही है।

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