‘ऑपरेशन सिंदूर’ से बढ़ा भरोसा, अब विश्वस्तरीय इंजन बनाने की तैयारी

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 6 फरवरी को बेंगलुरु स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के गैस टरबाइन अनुसंधान प्रतिष्ठान (जीटीआरई) का दौरा कर स्वदेशी सैन्य गैस टरबाइन इंजन विकास से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।

उन्हें निर्माणाधीन परियोजनाओं, भारतीय उद्योग व शिक्षण संस्थानों के साथ सहयोग और सशस्त्र बलों को दिए जा रहे तकनीकी समर्थन की जानकारी दी गई। रक्षा मंत्री ने विभिन्न स्वदेशी इंजनों एवं उनके पुर्जों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और ‘कावेरी’ इंजन के पूर्ण आफ्टरबर्नर परीक्षण को भी देखा।

एयरो इंजन में आत्मनिर्भरता पर जोर

रक्षा मंत्री ने वैज्ञानिकों से बातचीत करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को आत्मनिर्भरता के माध्यम से सशक्त बनाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में एयरो इंजन प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता अत्यंत आवश्यक है। सरकार इस दिशा में हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि आपूर्ति श्रृंखलाओं में वैश्विक बदलाव के बीच स्वदेशी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों का विकास ही देश को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाए रखेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार हर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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पांचवीं नहीं, छठी पीढ़ी की तैयारी

श्री सिंह ने उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) के डिजाइन एवं विकास में हो रही प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को केवल पांचवीं पीढ़ी के इंजनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जल्द से जल्द छठी पीढ़ी की उन्नत तकनीकों पर भी कार्य शुरू करना चाहिए। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और नई सामग्रियों के उपयोग को बढ़ाने पर भी उन्होंने बल दिया।

एयरो इंजन विकास को जटिल बताते हुए उन्होंने कहा कि विकसित देशों को भी अगली पीढ़ी के इंजन विकसित करने में 25-30 वर्ष लग जाते हैं। भारतीय वैज्ञानिकों से उन्होंने समयसीमा कम करने और राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप तेज गति से कार्य करने का आह्वान किया।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख

रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान संचार प्रणाली, निगरानी उपकरण और आक्रमण हथियारों सहित अनेक स्वदेशी प्रणालियों का सफल उपयोग हुआ, जिसने रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित किया। उन्होंने विश्वस्तरीय स्वदेशी प्रणालियों के निर्माण पर और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता जताई।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और दोहरे उपयोग की तकनीक

श्री सिंह ने एयरो इंजन विकास के लिए ब्रिटेन के साथ संयुक्त अध्ययन तथा राष्ट्रीय एयरो इंजन मिशन के तहत फ्रांस के साथ शुरू की गई प्रक्रिया का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह सहयोग नई प्रौद्योगिकियों को सीखने और पूर्व चुनौतियों को समझने में सहायक होगा।

उन्होंने जीटीआरई द्वारा विकसित उच्च तापमान कंपोजिट जैसी तकनीकों के नागरिक उड्डयन, बिजली उत्पादन और अंतरिक्ष क्षेत्रों में संभावित उपयोग की भी चर्चा की। भारत को तेजी से बढ़ते नागरिक उड्डयन बाजार के रूप में रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र की तकनीकी उपलब्धियां भविष्य में आर्थिक विकास को भी गति देंगी।

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