बाराबती से बिहार तक गूंजा परचम: सीनियर महिला वनडे प्लेट ग्रुप चैंपियन बनीं बिहार की बेटियां

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: ओडिशा के कटक स्थित ऐतिहासिक बाराबती स्टेडियम से लेकर पूरे बिहार तक जश्न का माहौल है। फरवरी 2026 में बिहार की महिला क्रिकेट टीम ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा आयोजित सीनियर महिला एकदिवसीय ट्रॉफी (प्लेट ग्रुप) का खिताब जीतकर राज्य के खेल इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहते हुए यह उपलब्धि हासिल की।

फाइनल में दमदार जीत

16 फरवरी 2026 को खेले गए फाइनल मुकाबले में बिहार ने सिक्किम को 7 विकेट से पराजित किया। पहले गेंदबाजी करते हुए बिहार की टीम ने विपक्ष को महज 135 रनों पर समेट दिया। इसके बाद 136 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम ने 35 ओवर में 3 विकेट खोकर 139 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।

प्रदर्शन जिसने दिल जीता

फाइनल में खुशबू सी. कुमारी ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 5 विकेट झटके और ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का पुरस्कार जीता। बल्लेबाजी में वैदेही यादव ने नाबाद 54 रन बनाकर टीम को जीत तक पहुंचाया, जबकि कप्तान प्रगति सिंह ने 45 रनों की अहम पारी खेली। पूरे टूर्नामेंट में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अपूर्वा कुमारी को ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ चुना गया।

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अजेय सफर, एलीट ग्रुप में एंट्री

बिहार की टीम ने प्रतियोगिता में एक भी मैच नहीं गंवाया और ‘अजेय’ रहते हुए प्लेट ग्रुप ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। इस जीत के साथ ही टीम ने प्लेट ग्रुप से आगे बढ़कर एलीट ग्रुप में जगह बना ली है। यह उपलब्धि न केवल खिलाड़ियों की मेहनत का परिणाम है, बल्कि बिहार में महिला क्रिकेट के बढ़ते आत्मविश्वास और मजबूत खेल संरचना का भी प्रमाण है।

इस सफलता के पीछे मजबूत प्रबंधन की भी अहम भूमिका रही। बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) ने खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं, प्रशिक्षण और मानसिक मजबूती का वातावरण उपलब्ध कराया। अध्यक्ष हर्ष वर्धन और सचिव ज़िआउल आरफीन के नेतृत्व में तैयार किए गए सपोर्ट सिस्टम ने टीम को पूरे टूर्नामेंट में अजेय बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। एसोसिएशन का स्पष्ट संदेश था, बेटियां रुकेंगी नहीं। टीम की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बिहार में जश्न का माहौल है।

यह जीत उन परिवारों के लिए भी गर्व का क्षण है, जिन्होंने सामाजिक रूढ़ियों को दरकिनार कर बेटियों को खेल के मैदान तक पहुंचाया। अब ये खिलाड़ी सिर्फ विजेता नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की प्रेरणा बन चुकी हैं, यह संदेश देते हुए कि हौसला, समर्थन और सही दिशा मिले तो बिहार की बेटियां इतिहास रच सकती हैं।

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