NEWS PR डेस्क: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर चल रही अटकलों पर पूर्ण विराम लगाते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया गया है और न ही किया जाएगा। राजस्थान की राजधानी जयपुर से किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार “किसान-प्रथम दृष्टिकोण” पर अडिग है।
गेहूं, चावल, मक्का और डेयरी पर ‘दरवाज़ा बंद’
केंद्रीय मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि गेहूं, चावल और मक्का जैसी संवेदनशील फसलों पर आयात का “दरवाज़ा पूरी तरह बंद” है। उन्होंने बताया कि चावल उत्पादन में भारत दुनिया में नंबर-1 है और ऐसे में किसानों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई आयात स्वीकार नहीं किया जाएगा।
डेयरी उत्पादों पर भी सरकार की स्थिति स्पष्ट है। मंत्री ने कहा कि दूध, घी, दही और पनीर सहित किसी भी डेयरी उत्पाद के आयात की अनुमति नहीं दी जाएगी, ताकि देश के दुग्ध उत्पादक किसानों के हित सुरक्षित रहें।
सेब आयात पर स्पष्टीकरण
सेब के मुद्दे पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए श्री चौहान ने कहा कि भारत को प्रतिवर्ष लगभग 5.5 लाख मीट्रिक टन सेब की आवश्यकता होती है, जो वर्तमान में तुर्की और ईरान जैसे देशों से आयात किया जाता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सीमित मात्रा (लगभग 1 लाख मीट्रिक टन) अमेरिका से आयात की जाती है और उस पर ₹80 प्रति किलो के ऊपर ₹25 शुल्क जोड़कर कोटा निर्धारित किया जाता है, तो इससे भारतीय उत्पादकों को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने इसे “स्रोत में मामूली बदलाव” बताया।
सोयाबीन, मक्का और कपास पर स्थिति स्पष्ट
सोयाबीन और मक्का पर किसी प्रकार की रियायत दिए जाने से मंत्री ने इनकार किया। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय कृषि उत्पादों का आयात काफी अधिक था, जिसमें डेयरी उत्पाद भी शामिल थे।
कपास के संबंध में उन्होंने बताया कि घरेलू उत्पादन की तुलना में उद्योगों की मांग अधिक होने के कारण सीमित आयात की आवश्यकता पड़ती है, जिससे टेक्सटाइल उद्योग, रोजगार और निर्यात को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि भारत का टेक्सटाइल निर्यात लगभग 4 लाख करोड़ रुपये का है और इसे 45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने की क्षमता है, जिसका लाभ अंततः किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को होगा।
मसाला फसलों को मिलेगा निर्यात बढ़ावा
राजस्थान में उत्पादित जीरा, मेथी और इसबगोल जैसी मसाला फसलों पर आयात की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है। मंत्री ने कहा कि भारतीय मसालों को अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में 0 फीसदी ड्यूटी पर निर्यात बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
“भारत नहीं झुकेगा, किसानों पर आंच नहीं आने देंगे”
श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश से दो वादे किए थे “भारत को कभी झुकने नहीं दूंगा” और “किसानों के हितों को सर्वोपरि रखूंगा।” सरकार इन दोनों संकल्पों पर पूरी मजबूती से खड़ी है। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे सुरक्षा के मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया गया, वैसे ही कृषि और किसानों के हितों पर भी कोई समझौता नहीं होगा।
सरकार का स्पष्ट संदेश: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर फैलाई जा रही आशंकाएं निराधार हैं और हर निर्णय किसान हित को केंद्र में रखकर ही लिया जाएगा।