15 जून से बंद हो जाएंगे बालू घाट, चार महीने तक निर्माण कार्यों पर पड़ेगा असर

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: मेसकौर और सीतामढ़ी थाना क्षेत्र से होकर गुजरने वाली तिलैया और ढाढ़र नदी के बालू घाटों पर आगामी 15 जून से बालू उठाव पूरी तरह बंद हो जाएगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश के बाद प्रशासन ने मानसून अवधि को देखते हुए यह प्रतिबंध लागू करने का फैसला लिया है। सरकारी आदेश के अनुसार 15 अक्टूबर तक नदियों से नए बालू खनन और उठाव पर रोक रहेगी।

प्रशासनिक निर्णय के बाद इलाके में निर्माण कार्यों पर बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। मकान निर्माण, सड़क और छोटे निजी निर्माण कार्यों में बालू की कमी और बढ़ती कीमतों का सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है।

मजदूरों के सामने रोजगार संकट

स्थानीय लोगों का कहना है कि बालू घाटों के बंद होने से सबसे अधिक परेशानी दिहाड़ी मजदूरों को होगी। घाटों के संचालन से सैकड़ों मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा था, लेकिन चार महीने तक खनन बंद रहने से अब उन्हें काम की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करना पड़ सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही सीमित रोजगार के बीच यह बंदी कई परिवारों के लिए आर्थिक संकट खड़ा कर सकती है।

मॉनसून से पहले बालू स्टॉक करने की होड़

मौसम विभाग ने 14 जून के आसपास बिहार में मानसून के प्रवेश की संभावना जताई है। ऐसे में घाट संचालकों और ठेकेदारों के बीच अभी से अधिक से अधिक बालू जमा करने की होड़ मच गई है। एसएच-103 पर मंझवे से कटघरा तक कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर बालू डंप किया जा रहा है।

सुबह से देर रात तक ट्रैक्टर और हाइवा के जरिए बालू स्टॉक करने का काम जारी है। प्रशासन के नियमों के अनुसार संचालक अपने आवंटित घाट से अधिकतम 300 मीटर की दूरी के भीतर ही बालू का भंडारण कर सकते हैं।

बिना आधिकारिक घाट के भी बन रहा बड़ा स्टॉक

दिलचस्प तथ्य यह है कि मेसकौर प्रखंड में कोई अधिकृत बालू घाट नहीं है, इसके बावजूद यहां से होकर तिलैया और ढाढ़र नदी गुजरती है। इसी कारण एसएच-103 के किनारे तीन अलग-अलग जगहों को चिन्हित कर बड़े पैमाने पर बालू स्टॉक किया जा रहा है।

बरसात के मौसम में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने और भारी मशीनों के संचालन में खतरे को देखते हुए सरकार ने 15 जून तक ही सीधे खनन की अनुमति दी है। इसके बाद केवल पहले से जमा बालू की बिक्री ही संभव होगी।

बरसात में बढ़ सकती हैं कीमतें

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष मॉनसून के दौरान बालू की कीमतों में भारी बढ़ोतरी होती है। संचालक ढुलाई, लोडिंग और स्टॉक की कमी का हवाला देकर अधिक कीमत वसूलते हैं। इस बार भी ऐसी स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है।

नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई

जिला खनन पदाधिकारी अमन कुमार ने स्पष्ट किया है कि एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार 15 जून से 15 अक्टूबर तक नदियों से बालू उठाव पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। उन्होंने सभी संचालकों को निर्देश दिया है कि वे निर्धारित 300 मीटर सीमा के भीतर ही बालू का भंडारण करें।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई संचालक तय सीमा से बाहर अवैध रूप से बालू डंप करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि 300 मीटर के दायरे में बालू स्टॉक करने की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की गई है।

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