NEWS PR डेस्क: पटना, 23 जून। बिहार सरकार राज्य में भू-जल संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन और सतत उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही नई भू-जल नीति लागू करने की तैयारी में जुट गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में लघु जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को भू-जल संरक्षण और विनियमन के लिए व्यापक नीति तैयार करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राज्य के जल संसाधनों की सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए भू-जल के संरक्षण, प्रबंधन और नियमन को लेकर संस्थागत एवं कानूनी ढांचे को मजबूत किया जाएगा।
‘बिहार भू-जल (प्रबंधन एवं विनियमन) अधिनियम-2026’ लाने की तैयारी
बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ‘बिहार भू-जल (प्रबंधन एवं विनियमन) अधिनियम-2026’ को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने की दिशा में कार्रवाई तेज करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इस कानून के माध्यम से भू-जल के अंधाधुंध दोहन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा और जल संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ती जल आवश्यकताओं और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए भू-जल संरक्षण अब केवल पर्यावरणीय विषय नहीं, बल्कि विकास और संसाधन प्रबंधन का भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है।
भू-जल स्तर में गिरावट रोकने के लिए बनेगी व्यापक कार्ययोजना
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने भू-जल स्तर में लगातार हो रही गिरावट पर चिंता जताई और वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपायों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जल संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग तथा भू-जल स्तर में सुधार के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाए।

उन्होंने कहा कि भू-जल संरक्षण के लिए केवल नई योजनाएं बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पहले से निर्मित संरचनाओं और परिसंपत्तियों का बेहतर रखरखाव और प्रभावी प्रबंधन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
वर्षा जल संचयन और रिचार्ज गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने विभाग को ऐसी कार्य संस्कृति विकसित करने का निर्देश दिया जिसमें वर्षा जल संचयन (Rain Water Harvesting), भू-जल पुनर्भरण (Recharge) तथा जल संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को बड़े स्तर पर प्रोत्साहन मिले।
उन्होंने कहा कि राज्य में जल संकट की संभावनाओं को कम करने और भू-जल स्तर को स्थिर रखने के लिए वर्षा जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है।
सभी विभागों के समन्वय से बनेगा मजबूत तंत्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि भू-जल प्रबंधन केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर एक सुदृढ़ और प्रभावी संस्थागत ढांचा विकसित किया जाएगा। इससे जल संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
सचिव ने प्रस्तुत की विभागीय योजनाओं की जानकारी
बैठक में लघु जल संसाधन विभाग के सचिव बी. कार्तिकेय धनजी ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विभाग की विभिन्न योजनाओं, उपलब्धियों और प्रस्तावित नीतिगत पहलों की विस्तृत जानकारी मुख्यमंत्री के समक्ष रखी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, “राज्य के जल संसाधनों की सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। भू-जल संरक्षण, पुनर्भरण और वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा देकर हम जल संसाधनों के सतत प्रबंधन की दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि विभाग ऐसी कार्य संस्कृति विकसित करे जिसमें जल संरक्षण को जनभागीदारी के साथ जोड़ा जा सके और वैज्ञानिक उपायों को व्यापक स्तर पर लागू किया जाए।
समीक्षा बैठक में लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह, लघु जल संसाधन विभाग के सचिव बी. कार्तिकेय धनजी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित ‘बिहार भू-जल (प्रबंधन एवं विनियमन) अधिनियम-2026’ प्रभावी ढंग से लागू होता है तो राज्य में भू-जल के अनियंत्रित दोहन पर रोक लगेगी, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में संभावित जल संकट से निपटने के लिए एक मजबूत आधार तैयार होगा। बिहार सरकार की यह पहल जल सुरक्षा और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
