NEWS PR डेस्क:बिहार में शराबबंदी के बाद नशे के कारोबार का चेहरा तेजी से बदलता नजर आ रहा है। अब शराब की जगह नशीले इंजेक्शनों की तस्करी युवाओं को निशाना बना रही है। इसी कड़ी में सुपौल पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 2,115 वायल नशीले इंजेक्शन बरामद किए हैं। मामले में एनडीपीएस एक्ट का फरार आरोपी संतोष मुखिया गिरफ्तार किया गया है।

सुपौल सदर थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर शहर के विद्यापुरी वार्ड संख्या-2 स्थित एक मकान में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान 4,230 एमएल (2,115 वायल) नशीले इंजेक्शन बरामद किए गए। मौके से संतोष मुखिया (पिता– कमल मुखिया), निवासी बेला गोठ, थाना किशनपुर, वर्तमान पता विद्यापुरी, को गिरफ्तार किया गया।
पहले से NDPS मामले में था फरार
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी लंबे समय से नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार में संलिप्त था। वह पहले से दर्ज एक एनडीपीएस (NDPS) मामले में फरार चल रहा था और पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। डीएसपी राजीव रंजन ने बताया कि सदर थाना अध्यक्ष रामसेवक रावत को सूचना मिली थी कि विद्यापुरी स्थित एक मकान से नशीले इंजेक्शनों की बिक्री की जा रही है। सूचना के सत्यापन के बाद देर रात पुलिस टीम ने छापेमारी की और भारी मात्रा में प्रतिबंधित इंजेक्शन बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पूरे नेटवर्क की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि नशीले इंजेक्शन कहां से मंगाए जाते थे, किन लोगों तक उनकी सप्लाई की जाती थी और इस अवैध कारोबार में कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि पूछताछ से नशा तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
शराबबंदी के बाद बदला नशे का ट्रेंड?
इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बिहार में शराबबंदी के बाद नशे का कारोबार अब नए रूप में युवाओं तक पहुंच रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नशीले इंजेक्शनों और अन्य मादक पदार्थों की बढ़ती तस्करी समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।सुपौल से अल्ताफ राजा की रिपोर्ट
