बिहार में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। जल्द ही राज्य की सभी सरकारी बसों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित फेस डिटेक्शन सिस्टम लगाया जाएगा। इस तकनीक के जरिए बसों में चढ़ने वाले यात्रियों की पहचान, गिनती और निगरानी रियल टाइम में की जा सकेगी।

जानकारी के अनुसार, बसों के मुख्य प्रवेश द्वार के पास विशेष फेस डिटेक्टर कैमरे लगाए जाएंगे, जिन्हें AI तकनीक से जोड़ा जाएगा। यह सिस्टम यात्रियों की संख्या दर्ज करने के साथ-साथ बसों में होने वाली गतिविधियों पर भी नजर रखेगा। सभी डिवाइस परिवहन विभाग के केंद्रीय कंट्रोल रूम से जुड़े रहेंगे, जहां से निगरानी की जाएगी।
बस यात्रियों की सुरक्षा में सुधार
परिवहन विभाग का मानना है कि नई तकनीक के इस्तेमाल से बस यात्रियों की सुरक्षा में सुधार होगा और बिना टिकट यात्रा करने वालों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। विभागीय समीक्षा में यह सामने आया है कि हाल के दिनों में बिना टिकट यात्रा और यात्रियों के बीच विवाद की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। इससे विभाग को राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
AI आधारित फेस डिटेक्शन सिस्टम के जरिए बस में चढ़ने वाले प्रत्येक यात्री की संख्या का सटीक रिकॉर्ड तैयार होगा। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि बस में कितने लोग सफर कर रहे हैं और कितने यात्रियों ने टिकट लिया है। अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक से राजस्व की चोरी रोकने में मदद मिलेगी और परिचालन व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी।
एलईडी स्क्रीन भी लगाई जाएंगी
इसके अलावा बसों के अंदर ऑनलाइन निगरानी को मजबूत करने के लिए एलईडी स्क्रीन भी लगाई जाएंगी। इन स्क्रीन के माध्यम से यात्रियों को बस के अंदर की गतिविधियों की जानकारी मिल सकेगी। इससे चोरी, छेड़छाड़ या किसी अन्य संदिग्ध गतिविधि की पहचान तुरंत की जा सकेगी और जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई संभव होगी।

इस संबंध में परिवहन विभाग के सचिव राजकुमार ने कहा कि AI आधारित फेस डिटेक्शन तकनीक यात्रियों की पहचान और गिनती को अधिक सटीक बनाएगी। विभाग जल्द ही इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से सभी सरकारी बसों में लागू करने की तैयारी कर रहा है।नई तकनीक के लागू होने के बाद बिहार की सरकारी बस सेवाओं में सुरक्षा, पारदर्शिता और यात्री सुविधा के नए मानक स्थापित होने की उम्मीद है।