फारबिसगंज: बुद्ध पूर्णिमा और मजदूर दिवस पर RITM में सेवा एवं जागरूकता कार्यक्रम, श्रमिकों को सम्मान

सेवा ही सच्चा धर्म, श्रम ही सच्ची शक्ति

Rashmi Tiwari
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फारबिसगंज स्थित रूंगटा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (RITM) परिसर में बुद्ध पूर्णिमा और अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर एक संयुक्त सामाजिक एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में शांति, करुणा, सेवा और श्रमिक सम्मान के मूल्यों को बढ़ावा देना रहा।
अहिंसा, सत्य, करुणा और मध्यम मार्ग
कार्यक्रम की शुरुआत गौतम बुद्ध के जीवन और उनके उपदेशों—अहिंसा, सत्य, करुणा और मध्यम मार्ग—पर विस्तृत चर्चा के साथ हुई। वक्ताओं ने बुद्ध के विचारों को आज के समय में भी अत्यंत प्रासंगिक बताया और कहा कि उनका संदेश समाज में शांति और संतुलन स्थापित करने का मार्ग दिखाता है।
श्रमिकों के बीच फल एवं आवश्यक सामग्री का वितरण
इसके साथ ही श्रमिक दिवस के महत्व को रेखांकित करते हुए वक्ताओं ने श्रमिकों को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। कार्यक्रम के दौरान संस्थान परिसर में कार्यरत श्रमिकों के बीच फल एवं आवश्यक सामग्री का वितरण भी किया गया, जिससे सेवा और मानवता का संदेश दिया गया। इस अवसर पर एमडीएमएस, अररिया के निदेशक डॉ. संजय प्रधान, RITM के प्राचार्य डॉ. राशिद हुसैन, प्रशासनिक पदाधिकारी श्री एस.बी. कुमार, पुस्तकालयाध्यक्ष श्रीमती इंदु कुमारी, श्री उत्कर्ष कुमार सहित अन्य कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
सेवा ही सच्चा धर्म है
डॉ. संजय प्रधान ने अपने संबोधन में स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि सेवा ही सच्चा धर्म है। उन्होंने वेल्लोर में रामकृष्ण मठ की स्थापना का उदाहरण देते हुए कहा कि गरीबों की सेवा करना मंदिर में पूजा से भी बड़ा कार्य है। उन्होंने महात्मा गांधी से पहले ही गौतम बुद्ध द्वारा सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देने की बात भी कही।
तकनीकी कर्मचारियों और अभियंताओं का योगदान
आर.के. रूंगटा चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष महावीर प्रसाद रूंगटा ने कहा कि संस्थान की प्रगति में श्रमिकों, तकनीकी कर्मचारियों और अभियंताओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। ट्रस्टी उर्मिला रूंगटा ने कहा कि सेवा, परिश्रम और समर्पण ही किसी भी संस्थान और समाज की असली शक्ति है।
विद्यार्थियों में श्रम के प्रति सम्मान की भावना
प्राचार्य डॉ. राशिद हुसैन ने विद्यार्थियों में श्रम के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने पर जोर दिया। वहीं प्रशासनिक पदाधिकारी एस.बी. कुमार ने श्रमिकों के योगदान को संस्थान के विकास की रीढ़ बताते हुए उन्हें प्रेरणास्रोत कहा। कार्यक्रम का समापन शांति, समानता, श्रम सम्मान और सेवा भावना को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ किया गया।
फारबिसगंज से धन्नु मिश्रा की रिपोर्ट

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