मिशन पोषण 2.0 से कुपोषण पर वार, स्मार्टफोन से सशक्त हुए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: दिल्ली/पटना। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत संचालित मिशन पोषण 2.0 ने देशभर में पोषण सेवाओं की निगरानी और कार्यप्रणाली को नई दिशा दी है। इस पहल के तहत अग्रिम पंक्ति के आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन उपलब्ध कराकर उन्हें तकनीकी रूप से सशक्त बनाया गया है, जिससे वे अब वास्तविक समय में बच्चों और महिलाओं से जुड़े पोषण डेटा को दर्ज और ट्रैक कर पा रहे हैं।

मंत्रालय द्वारा विकसित पोषण ट्रैकर एक डिजिटल एप्लिकेशन है, जो आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़े लाभार्थियों के पोषण संकेतकों का लगभग रियल-टाइम डेटा एकत्र करता है। इस तकनीक के माध्यम से बच्चों में नाटापन (स्टंटिंग), दुबलापन (वेस्टिंग) और कम वजन (अंडरवेट) जैसी समस्याओं की पहचान अब अधिक सटीक और तेज़ी से संभव हो पाई है।

सरकार ने प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र पर ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस (GMD) की व्यवस्था की है, जिससे बच्चों की नियमित वृद्धि निगरानी सुनिश्चित की जा सके। साथ ही, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को हर साल 2000 रुपये इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए दिए जा रहे हैं, ताकि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग कर सकें।

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मिशन पोषण 2.0 के तहत केवल तकनीकी सशक्तिकरण ही नहीं, बल्कि सामुदायिक जागरूकता पर भी विशेष जोर दिया गया है। पोषण पखवाड़ा और पोषण माह जैसे अभियानों के माध्यम से लोगों को सही खानपान और स्वास्थ्य संबंधी आदतों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। वर्ष 2018 से अब तक 150 करोड़ से अधिक जन-जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा चुकी हैं, जबकि 2021 से फरवरी 2026 तक लगभग 9.8 करोड़ सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित हुए हैं।

सरकार का यह समग्र दृष्टिकोण मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। मिशन के तहत पूरक पोषण, प्री-स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और रेफरल सेवाओं सहित छह प्रमुख सेवाएं प्रदान की जा रही हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सहयोग से जमीनी स्तर पर लागू किया जा रहा है।

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि मिशन पोषण 2.0 देश में कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए एक मजबूत और तकनीक-आधारित व्यवस्था स्थापित कर रहा है, जिसका सकारात्मक असर अब आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है।

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